बैलेट पेपर पर भी नहीं खुला कांग्रेस का खाता! अपनी ही सरकार वाले कर्नाटक में चारों MLC सीटें हारी पार्टी, अब EVM को क्या कहेंगे राहुल गांधी?

बेंगलुरु (ज़ीशान हैदर): कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों के नतीजों ने कांग्रेस को राजनीतिक रूप से असहज स्थिति में ला दिया है। राज्य में अपनी सरकार होने के बावजूद पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल सेक्युलर (JDS) के गठबंधन ने चारों सीटों पर कब्जा जमा लिया। खास बात यह है कि इन चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ था। ऐसे में नतीजों के बाद JDS ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि अब कांग्रेस अपनी हार के लिए किसे जिम्मेदार ठहराएगी?

बैलेट पेपर पर हार, तो EVM पर क्या कहेंगे राहुल गांधी?

कांग्रेस लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल उठाती रही है और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है। इसी मुद्दे पर JDS नेता निखिल कुमारस्वामी ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को संबोधित करते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के रहते शिक्षकों ने बैलेट पेपर से मतदान किया, फिर भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब कांग्रेस किस बात का बहाना बनाएगी।

निखिल कुमारस्वामी की यह टिप्पणी चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस पर विपक्ष के राजनीतिक हमले का हिस्सा है। हालांकि, इन नतीजों को EVM से जुड़े व्यापक विवाद का निर्णायक जवाब मानने के बजाय चुनाव की परिस्थितियों और संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों के संदर्भ में देखना जरूरी है। फिलहाल, कांग्रेस की हार ने विपक्ष को उसे घेरने का नया मौका दे दिया है।

चार सीटें, चारों पर विपक्ष की जीत; BJP ने बचाईं अपनी तीनों सीटें

कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। नतीजों में BJP ने उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की। वहीं, JDS ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस को हराकर चौथी सीट भी गठबंधन के खाते में डाल दी।

इन चुनावों को BJP और JDS के बीच तालमेल की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा था। दोनों दलों के सामने चुनौती थी कि वे एक-दूसरे के उम्मीदवारों के पक्ष में अपने समर्थकों के वोट ट्रांसफर करा पाते हैं या नहीं। चारों सीटों पर जीत गठबंधन के लिए अहम रही, जबकि कांग्रेस को सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।

बेंगलुरु में JDS के एपी रंगनाथ ने पुट्टन्ना को हराया

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में JDS उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा MLC पुट्टन्ना को 908 वोटों से शिकस्त दी। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना के खाते में 9,902 वोट आए।

इस मुकाबले की एक राजनीतिक पृष्ठभूमि भी है। पुट्टन्ना ने 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले JDS छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। दोनों उम्मीदवार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। इस सीट पर JDS की जीत ने गठबंधन के प्रदर्शन को मजबूत किया।

इस निर्वाचन क्षेत्र में 81.98 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। कुल 27,405 मतदाताओं में से 22,468 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इनमें 21,056 मत वैध पाए गए, जबकि 1,857 मत अवैध घोषित किए गए।

खरगे के गृह क्षेत्र वाले इलाके में भी कांग्रेस को झटका

उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में BJP के मौजूदा MLC शशिल जी. नामोशी ने कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को हराया। नामोशी को 15,596 वोट मिले, जबकि मत्तूर को 12,299 वोट हासिल हुए। इस तरह नामोशी ने 3,297 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस सीट से उनकी यह पांचवीं जीत थी।

इस नतीजे की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र में कलबुर्गी और कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के आसपास के जिले शामिल हैं। कलबुर्गी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह क्षेत्र है। यहां भी BJP उम्मीदवार ने अपनी सीट बरकरार रखी।

दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में BJP के केएम सुरेश ने कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मठ को 23,098 वोटों से हराया। वहीं, पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में BJP के मौजूदा MLC एसवी संकनूर ने कांग्रेस के मोहन लिम्बिकाई को 9,323 वोटों से शिकस्त दी। संकनूर को 33,711 वोट मिले, जबकि लिम्बिकाई को 24,388 वोट हासिल हुए।

कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर कितना असर पड़ेगा?

चारों सीटों पर हार कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटका है, लेकिन इससे राज्य सरकार की स्थिरता पर तत्काल बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। कर्नाटक विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस के 38, BJP के 24 और JDS के छह सदस्य हैं। सदन में एक निर्दलीय सदस्य और सभापति भी हैं, जबकि सरकार की ओर से मनोनीत किए जाने वाले पांच सदस्यों की सीटें खाली हैं।

ऐसे में इन चुनावों के नतीजों से विधान परिषद में सत्ता का पूरा गणित बदलता नजर नहीं आता। लेकिन विपक्ष को कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए एक राजनीतिक मुद्दा जरूर मिल गया है। BJP और JDS इस प्रदर्शन को कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

कांग्रेस के लिए सियासी संदेश क्या है?

कर्नाटक के MLC चुनाव में कांग्रेस की हार का सबसे स्पष्ट संदेश यह है कि राज्य में सत्ता में होने के बावजूद पार्टी इन चार निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल नहीं कर सकी। दूसरी ओर, BJP और JDS ने मिलकर चुनाव लड़ा और सभी सीटें जीत लीं। इससे दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।

बैलेट पेपर पर हुए चुनाव को लेकर JDS का तंज इस हार को और राजनीतिक रंग दे रहा है। हालांकि, चार सीटों के नतीजे अपने आप में EVM से जुड़े सभी सवालों का अंतिम जवाब नहीं हैं। चुनावी प्रदर्शन पर उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों और मतदाता समूहों का भी असर पड़ता है। फिलहाल, कांग्रेस के लिए चुनौती अपनी हार की वजहों का आकलन करने और विपक्ष के हमलों का जवाब देने की है। वहीं, BJP-JDS गठबंधन को इन नतीजों से कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपनी आवाज तेज करने का मौका मिल गया है।

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